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तिरुअनंतपुरमः राष्ट्रीय राजमार्ग के मसले पर केन्द्र के साथ केरल का चल रहा टकराव अब समाप्त हो गया है। केरल सरकार ने आखिरकार हठधर्मिता के ऊपर व्यावहारिकता को महत्व दिया और अब केन्द्र सरकार की बात मानने को तैयार हो गया है।

भारत की राष्ट्रीय कृषि अनुसंधान प्रणाली

By: डॉ एस अय्यप्पन  on: Tue 31 of Aug, 2010 13:16 UTC  (9 Reads)
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राष्ट्रीय कृषि अनुसंधान प्रणाली दुनिया की सबसे बड़ी प्रणालियों में से एक है जो कृषि उत्पादकता एवं उत्पादन बढाने वाली प्रौद्योगिकियों के सृजन के माध्यम से कृषि के सर्वांगीण विकास में उत्प्रेरक भूमिका निभा रही है। भारत एक समय खाद्यान्नों के लिए आयात पर निर्भर रहता था लेकिन अब वह खाद्यान्नों का निर्यात करने लगा है।
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नई दिल्ली: स्थानीय स्वास्थ्य अधिकारी मच्छरों पर नियंत्रण के लिए व्यापक स्तर पर उपाय कर रहे हैं। इनमें फॉगिंग और दवाईयों के छिड़काव से मच्छरों के लार्वा को खत्म करने जैसे उपाय शामिल हैं। इन सामानों का पर्याप्त भंडार उपलब्ध है। रेलवे ने रेल लाईनों के किनारों पर फॉगिंग शुरू कर दी है।

भारतीय कोरपोरेट क्षेत्र और विकास

By: आर बंदोपाध्याय  on: Tue 31 of Aug, 2010 13:02 UTC  (7 Reads)
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आर्थिक सुधार, जो 1980 के दशक में शुरू किया गया और मौजूदा दशक में जिसे नयी दिशा दी गयी, के साथ भारतीय कोरपोरेट क्षेत्र लगातार विकास कर रहा है और लगातार वैश्विक अर्थव्यवस्था का अभिन्न हिस्सा बनता जा रहा है। जहां पिछली सहस्राब्दि के अंतिम दशक में विदेशी कंपनियों ने भारत में खूब निवेश किया है वहीं नयी शहस्राब्दि के पहले दशक में भारतीय कंपनियों ने विदेश में उल्लेखनीय निवेश किया है। इस दशक में संपोषणीय उच्चवृध्दि देखी गयी । कोरपोरेट क्षेत्र भारतीय अर्थव्यवस्था की वृध्दि का मुख्य वाहक बनता जा रहा है।
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भारत में ग्रामीण व्यवसाय केन्द्र

By: विशेष संवाददाता  on: Tue 31 of Aug, 2010 12:59 UTC  (4 Reads)
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हमारे देश में पंचायतें सबसे निचले स्तर की संस्थायें हैं और ग्रामीण क्षेत्रों में समाजिक तथा आर्थिक विकास में प्रगति लाने के मामले में इन्हें संवैधानिक अधिकार प्राप्त है। ग्रामीण व्यवसाय केन्द्र की पहल का मुख्य उद्देश्य मात्र आजीविका सहयोग से आगे बढ़कर ग्रामीण समृध्दि को प्रोत्साहन देना, गैर-कृषि आमदनी को बढ़ाना और ग्रामीण रोजगार की वृध्दि करना है। इस स्कीम का मुख्य उद्देश्य पंचायती राज संस्थाओं के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों के लिए भारत के त्वरित आर्थिक विकास का विस्तार करना है।
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राष्ट्रमंडल खेल का असर

खेलों के दौरान दिल्ली छोड़ देंगे अनेक दिल्लीवासी
By: उपेन्द्र प्रसाद  on: Tue 31 of Aug, 2010 10:16 UTC  (4 Reads)
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नई दिल्लीः अगले महीने की 3 तारीख से दिल्ली में राष्ट्रमंडल से खेल शुरू होंगे और दो सप्ताह तक चलेंगे। इस दौरान दिल्ली के स्कूलों में छुट्टियां घोषित कर दी गई हैं। स्कूल में बच्चों को बताया गया था कि खेल के दौरान छुट्टियां इसलिए घोषित की गईं, ताकि वे राष्ट्रमंडल खेलों का लुत्फ उठा सके।

भारत से गायब हो चुके चीते को बसाने की परियोजना-प्रोजेक्ट चीता

By: सुरेश प्रकाश अवस्थी   on: Mon 30 of Aug, 2010 13:33 UTC  (5 Reads)
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भारत सरकार ने हाल ही में देश में लुप्त हो चुके चीते को फिर से जंगलों में बसाने की तीन अरब रुपये की योजना को स्वीकार कर वन्य जीव प्रेमियों को एक बड़ी खुशखबरी दी है। करीब आधी सदी पूर्व देश से गायब हो चुके चीते को बसाने की परियोजना-प्रोजेक्ट चीता-के पहले चरण को स्वीकृति मिल गई है। केन्द्रीय वन एवं पर्यावरण राज्य मंत्री श्री जयराम रमेश के अनुसार मध्य प्रदेश में दो और राजस्थान में एक वन क्षेत्र को इस परियोजना के लिए चुना गया है। इन वन क्षेत्रों में शुरू में छ:-छ: चीते लाए जाएंगे। आशा है कि तीन चार वर्षों में चीते भारत में फिर से छलांगे भरने लगेंगे।
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भारत में शिक्षा : भविष्य के लिए एक नई परिकल्पना

By: कपिल सिब्बल  on: Mon 30 of Aug, 2010 13:28 UTC  (6 Reads)
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देश का मानव संसाधन विकास मंत्री होने के नाते यह सुनिश्चित करना मेरार् कत्ताव्य और दायित्व है कि हमारे बच्चे, मेरे मंत्रालय द्वारा शुरू किये जा रहे महत्वाकांक्षी शिक्षा सुधार कार्यक्रम के केंद्र में रहें। राष्ट्र के रूप में हम इस समय सामूहिक रूप से कुछ ऐतिहासिक कदम उठाने जा रहे हैं जिससे हमारे बच्चे सशक्त बनेंगे और फिर उससे समूचा राष्ट्र सशक्त बनेगा। भविष्य की मेरी जो परिकल्पना है वह पूर्णतया बाल केन्द्रित शिक्षा प्रणाली की ही है। हम अतीत में ही नहीं बने रह सकते। हमें अपने आपको विश्वभर में हो रहे परिवर्तनों की प्रक्रिया के साथ कदम मिला कर चलना होगा। हमें अतीत से कुछ सबक लेकर उस पर वर्तमान का निर्माण करना है और हमारी वर्तमान पीढ़ी के साथ-साथ भावी अजन्मी पीढ़ी के भविष्य के लिए सुनहरे अवसरों का सृजन करना होगा।
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आम जनता 20 पर उसके प्रतिनिधि 20 हजार पर काट रहे हैं दिन

By: कुमार अमिताभ  on: Mon 30 of Aug, 2010 13:24 UTC  (6 Reads)
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जिस देश की दो तिहाई से भी ज्यादा आबादी मात्र 20 रुपए प्रतिदिन पर गुजारा करती हो, लगभग आधी जनता गरीबी के चपेट में हो, वहीं के सांसद यानि जनप्रतिनिधि, नौकरशाहों और व्यावसायिक पदों की तुलना में वेतन बढ़वा लें तो वह किस वर्ग के प्रतिनिधि कहलाएंगे यह उन्हें स्पष्ट कर देना चाहिए। कम से कम जन के प्रतिनिधि वह कतई नहीं हो सकते हैं।
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भगवा से इतना डर क्यों?

By: डा शंकर स्वरूप शर्मा  on: Mon 30 of Aug, 2010 13:13 UTC  (5 Reads)
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भारतीय सभ्यता और संस्कृति की ये सरकार कभी भी हिस्सेदार नहीं रहीं क्योंकि यह सरकार हमेशा ही तथाकथित धर्मनिरपेक्षता की सरकार मानी जाती रही है। इसके पीछे उनका फूटता अन्य धर्मों से प्रेम है जो कभी भी इस धरती को सुखचैन से जीने का हक न देने की जीवनभर की कसम खा रखी है। महात्मा गांघी का राम-रहीम का नारा केवल हिन्दू और मुस्लिम भाईयों को एक साथ लेकर हिन्दुस्तान को आजाद कराने का था लेकिन ब्रिटिश हूकूमत इस हक में नहीं थी कि भारत में कभी अमन-चैन कायम हो सके।
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