वित्तीय सुधार विधेयकों पर धीरे चलेगी सरकार

विपक्ष की एकता ने सरकार को मुश्किल में डाला
By: नित्य चक्रवर्ती   on: Thu 11 of Mar, 2010 09:43 UTC  (1 Reads)
India
नई दिल्लीः बढ़ती कीमतों के मसले पर विपक्षी दलों में आई एकता ने केन्द्र सरकार को चिंता में डाल दिया है और उसके कारण वित्तीय सुधारों का उसका इरादा खटाई में पड़ता दिख रहा है। घरेलू एवं विदेशी स्रोतों से विदेशी निवेश हासिल करने के लिए केन्द्र सरकार वित्तीय क्षेत्रों में सुधार का इरादा रखती थी। मनमोहन सिंह की सरकार अपनी पहली पाली में उन सुधारों पर आगे नहीं बढ़ पाई थी, क्योंकि तब उसके समर्थक वामपंथी दल उसे उनपर आगे नहीं बढ़ने दे रहे थे। लेकिन अब बढ़ती कीमतों के मसले पर विपक्षी दलों में पैदा हुई एकता ने उसका काम कठिन कर दिया है।

महिला आरक्षण के सख्त विरोध में

By: राजकिशोर  on: Wed 10 of Mar, 2010 09:42 UTC  (6 Reads)
India
महिला आरक्षण विधेयक अगर पास हो गया, तो कोई प्रलय नहीं आ जाएगा। लेकिन मीडिया में और खासकर महिला जगत में इसे ले कर उत्सव का जो माहौल है, वह लगभग अश्लील जान पड़ता है। इनके मूड से ऐसा लगता है जैसे जन्नत का एक-तिहाई हिस्सा महिलाओं को सौंप दिया जानेवाला है और कुछ गंवार लोग इसके विरोध में लट्ठ ले कर घूम रहे हैं।
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भारत

खतरनाक है महिला आरक्षण

जिम्मेदार लोकतंत्र पर करारा प्रहार
By: उपेन्द्र प्रसाद  on: Wed 10 of Mar, 2010 09:35 UTC  (5 Reads)
India
महिला आरक्षण विधेयक राज्य सभा से पारित हो गया। इसे जिस तरह का समर्थन मिल रहा था, उसे देखते हुए इसे पारित होना ही था, सिर्फ केन्द्र सरकार की तरफ से राजनैतिक संकल्प दिखाए जाने की जरूरत थी। वह कमी सोनिया गांघी ने अपनी मरफ से पूरी की दी। इसका विरोध भी हुआ। लेकिन जिस मसले को लेकर इसका सबसे ज्यादा विरोध किया जाना था, उस मसले को उठाया ही नहीं गया।
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India
नई दिल्ली। काफी जद्दोजहद के बाद आज राज्य सभा में महिला आरक्षण विधेयक पारित हो गया।सरकार ने अपनी लाज तो बचा ली लेकिन इस दौरान विधेयक के विरोध में राज्य सभा में राजद तथा सपा सांसदों जो कुछ किया गया वह संसद के इतिहास में काला धब्बा के रूप में जाना जाएगा।राज्य सभा अध्यक्ष के सामने उपद्रव करने वाले सात संासदों केा निलंबित चालू सत्र तक के लिए निलंबित कर दिया गया।इन सदस्यों को आज सदन से बाहर करने के लिए मार्शलों की ताकत का इस्तेमाल किया गया।

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संघ का भोपाल सम्मेलन

भाजपा से अलग मत जाहिर किए गए
By: एल एस हरदेनिया  on: Tue 09 of Mar, 2010 08:45 UTC  (5 Reads)
India
भोपालः राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का भोपाल में कुठ दिन पहले ही एक सम्मेलन हुआ। उस सम्मेलन में यदि लोगों की उपस्थिति कोई संकेत है, तो मानना पड़ेगा कि मध्य प्रदेश में संघ अपना आघार खो रहा है।

राजनीति में आरक्षण के खिलाफ

By: राजकिशोर  on: Mon 08 of Mar, 2010 03:14 UTC  (6 Reads)
India
मामला महिलाओं का है। वर्तमान समय में किसकी हिम्मत है कि महिलाओं के मिलनेवाली किसी सुविधा का विरोध करे। ऐसा व्यक्ति तत्काल स्त्री-विरोधी करार दिया जाएगा। मुझे ऐसा कहलाने का कोई शौक नहीं है। महिलाओं को उनके हक मिलें, इससे मुझे हार्दिक प्रसन्नता होगी। मैं तो यहां तक चाहता हूं कि स्त्री होने के नाते उन्हें पुरुषों से कुछ ज्यादा ही अधिकार मिलें। इसलिए नहीं कि अतीत में उनके साथ बहुत दुर्व्यवहार हुआ है। इसलिए कि प्रकृति ने उन्हें कुछ अलग बनाया है और कुछ खास जिम्मेदारियां सौंपी हैं।
भारत

कांग्रेस आलाकमान के ताजा निर्णय के खतरे

नाकाम हो सकता है मिशन 2012
By: प्रदीप कपूर  on: Mon 08 of Mar, 2010 03:14 UTC  (4 Reads)
India
लखनऊः कांग्रेस आलाकमान द्वारा उत्तर प्रदेश में उठाए गए ताजा कदमों से राज्य में कांग्रेस और उसकी प्रदेश अघ्यक्षा रीता जोशी बहुगुणा के कमजोर हो जाने का खतरा पैदा हो गया है।
भारत

संसद में महिला आरक्षण विधेयक

क्या एक बार फिर इतिहास दुहराया जाएगा?
By: उपेन्द्र प्रसाद  on: Sat 06 of Mar, 2010 09:12 UTC  (11 Reads)
India
महिला आरक्षण विधेयक एक बार फिर संसद मे पेश किया जाएगा। 1996 से अब तक यह इतनी बार संसद में पेश किया गया है कि पेश किया जाना अब कोई बड़ी बात नहीं रही। बड़ी बात तो तब होगी, जब महिला आरक्षण विधेयक पास कर दिया जाएगा। पहले यह लोकसभा में पेश किया जाता था और लोकसभा भंग होने अथवा उसका कार्यकाल पूरा होने बाद लैप्स कर जाता था। पर मनमोहन सिंह सरकार ने पिछली बार समझदारी दिखाते हुए इस विधेयक को राज्य सभा में पेश किया था, जो एक स्थाई सदन है और जो न तो कभी भंग होती और न ही कभी उसका कार्यकाल पूरा होता है।
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India
बजट प्रस्तावों के द्वारा डीजल और पेट्रोल की कीमतों में वृद्घि के मसले पर विपक्षी पार्टियां एकजुट हो रही हैं। क्या केन्द्र सरकार को उनकी एकता से डरना चाहिए? आखिर केन्द्र सरकार उनकी सम्मिलित चुनौतियों का सामना कैसे करेगी? यह सच है कि केन्द्र सरकार अब पूर्ण बहुमत में है, इसलिए वह पहले की तरह कतजोर नहीं है। लेकिन फिर भी वह विपक्षी दलों द्वारा मिल रही सम्मिलित चुनौती की उपेक्षा नहीं कर सकती।
India
नई दिल्ली। नक्सलवाद ओर आतंकवाद से जूझ रहे प्रदेशों में जहां पुलिस बल और संसाधनों की भारी कमी है वहीं देश की राजधानी दिल्ली में पुलिस बलों की संख्या भर्ती मानको के अनुसार तए गए स्वीकृत पदों से काफी ज्यादा है। यह और बात है कि दिल्ली पुलिस के जवान अच्छी खासी संख्या में वीआईपी सुरक्षा में लगे होते हैं। जिन्हें दिल्ली में आपराधिक वारदातों के शिकार बन रहे आम आदमी की कोई फ्रिक नहीं होती है।

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